Story of Sem Mukhem | सेम मुखेम नागराज देवता

Story of Sem Mukhem ( Use headphones )

सेम मुखेम, नागराज देवता का एक पौराणिक मंदिर है। उत्तराखंड में यह नाग मंदिर काफी प्रसिद्ध है और इससे जुडी बहुत सी कहानियां है।  इस वीडियो में तीन कहानियो का जिक्र किआ गया है जो की सबसे ज्यादा वास्तविक मानी जाती है। 

सेम मुखेम को उत्तराखंड का पांचवा धाम तथा उत्तर धाम भी कहा जाता है।  सेम मुखेम मंदिर टिहरी जिले के प्रताप नगर तहसील में समुद्र तल से तक़रीबन 7000 फ़ीट की ऊंचाई तथा मुखेम गांव से 2 KM की दूरी पर स्थित है। 

सेम मुखेम मंदिर शृद्धालुओ में सेम नागराजा के नाम से प्रसिद्ध है, यह एक प्रसिद्ध नाग तीर्थ है।  सेम मुखेम मंदिर का द्वार बहुत ही भव्य एवं विशाल है जो 14 फुट चौड़ा व 27 फुट ऊँचा है।  इस विशाल द्वार के शीर्ष पर नागराज फन फैलाये है और  भगवान श्री कृष्ण नागराज के फन के ऊपर बंशीधर के रूप में लीन है।  
रमोला गढ़ के गढ़पति गंगू रमोला यहाँ के राजा थे। गंगू रमोला काफी वृद्ध थे एवं उनकी  कोई संतान नहीं थी। गंगू रमोला की पत्नी मैणावती श्री कृष्ण की उपासक थी,  दूसरी तरफ गंगू रमोला देवीय शक्तियों पर इतना यकीन नहीं रखते थे।  
गंगू रमोला की मुर्तिया भी इस मंदिर में उपस्थित है। 
सेम मुखेम से जुडी सभी कहानियो को इस वीडियो में मैंने जोड़ा है। हैडफ़ोन लगा कर यह वीडियो देखे तो ज्यादा आंनद आएगा। 
भारतवर्ष में कृष्ण जी को पूजा जाता है तथा उनका देवभूमि में होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।  उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है इसलिए नहीं की यहाँ मंदिर है ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ के लोगो की भगवान के प्रति आस्था एवं प्रेम बहुत ही ज्यादा है। देवभूमि में जो मानगो वो प्राप्त होता है। 

जय सेम नागराज, जय श्री कृष्ण 
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